Rakesh Kumar
तकनीक और आधुनिकता के दौर में गया जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सभ्य समाज पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर बंधुआ महादलित टोला शांति नगर में अंधविश्वास ने एक बेगुनाह की जान ले ली। ओझा-गुनी और तांत्रिक होने के शक में उग्र भीड़ ने 55 वर्षीय राजेंद्र मांझी को उनके परिजनों के सामने ही लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुधवार की आधी रात करीब 15 से 20 लोग हथियारों से लैस होकर राजेंद्र मांझी के घर में घुस गए। घर के आंगन में चीख-पुकार मच गई। पत्नी, बच्चे और परिजन हमलावरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन भीड़ पर खून सवार था। हमलावरों ने राजेंद्र को इतनी बेरहमी से पीटा कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घर के दरवाजे और आंगन में बिखरे खून के धब्बे इस बर्बरता की गवाही दे रहे हैं।
हत्या के बाद रची गई साजिश
हत्यारों ने वारदात को हादसा साबित करने के लिए एक खौफनाक साजिश भी रची। हत्या के बाद शव को गया-धनबाद रेलखंड पर बंधुआ स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया। कुछ देर बाद ट्रेन गुजरने से शव क्षत-विक्षत हो गया, ताकि हत्या के सबूत मिटाए जा सकें। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में पूरा मामला हत्या का निकला।
13 साल के बच्चे की मौत से जुड़ा अंधविश्वास
पुलिस के मुताबिक करीब 8-10 दिन पहले गांव के टुनटुन मांझी का 13 वर्षीय बेटा ताड़ के पेड़ से गिरकर मर गया था। दुर्घटना को कुछ लोगों ने अंधविश्वास का रंग दे दिया और राजेंद्र मांझी पर ओझा-गुनी तथा तांत्रिक क्रिया करने का आरोप लगाने लगे। देखते ही देखते अफवाह ने उन्मादी रूप ले लिया और आखिरकार एक निर्दोष व्यक्ति की जान चली गई।
100 घरों की बस्ती, लेकिन कोई नहीं आया बचाने
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शांति नगर में लगभग 100 महादलित परिवार रहते हैं, लेकिन जब राजेंद्र मांझी को पीट-पीटकर मारा जा रहा था, तब कोई भी उन्हें बचाने के लिए आगे नहीं आया। भय और भीड़ की हिंसा के सामने पूरा टोला मूकदर्शक बना रहा।
13 नामजद, दो गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस और डीएसपी सुनील कुमार पांडेय मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पुत्र अनुज कुमार के बयान पर 13 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरेंद्र मांझी और उसकी पत्नी कारी देवी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।
गया में अंधविश्वास की यह पहली घटना नहीं
चिंता की बात यह है कि गया जिले में डायन, ओझा-गुनी और तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ दिन पहले फतेहपुर थाना क्षेत्र में भी दो महिलाओं की इसी तरह पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज आज भी अंधविश्वास की जंजीरों से मुक्त नहीं हो पाया है?
सवाल जो झकझोरता है
मोबाइल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में अगर किसी व्यक्ति को महज शक और अंधविश्वास के आधार पर भीड़ मौत के घाट उतार दे, तो यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज की सोच और व्यवस्था दोनों की असफलता है। शांति नगर की यह घटना बता रही है कि विज्ञान के युग में भी अंधविश्वास का अंधेरा कई जिंदगियों को निगल रहा है।